त्याग क्या है , क्या समर्पण ?
मांग क्या है , क्या है अर्पण ?
मन तो मेरा , प्रेम का दर्पण ।
मन तो मेरा प्रेम का दर्पण।
आस्था का पावन कलश है ।
आस का ये दीपक है ।
स्नेह का ये श्रद्धा सुमन है ।
मन तो मेरा ,प्रेम का दर्पण ।
वचनों की नहीं बेड़ियाँ ।
ना रीतियों की कड़ियाँ ।
द्वेष की ना आंधियां ।
मन तो मेरा , प्रेम का दर्पण ।
अम्बर की सतरंगी छटा है ।
धरती की ये गरिमा है ।
नदी की अल्हड़ता है ।
मन तो मेरा , प्रेम का दर्पण।
इच्छाओं का विष नहीं ।
सीमाओं का बंधन नहीं ।
उत्कण्ठाओं की उड़ान नहीं ।
मन तो मेरा ,प्रेम का दर्पण ।
मन तो मेरा , प्रेम का दर्पण ।
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