शायरी

१। ये जो तेरी ठुकरा के चलने की फितरत है
इल्ज़ामों की सौगात देने की आदत है
यकीं मानो हमने सब रखी है हिफाज़त से

२।जब बैठे थे हम तेरे दर पे
तू मशरूफ था मेरी मुकद्दर को अंजाम देने में
आ कुछ वक़्त मेरी रहाईश में
सज़दा कर खुदा की रहमत पे

2 responses to “शायरी”

  1. वाह वाह……क्या कहने…..👏👏👏👏👏
    Girl, you are truly talented

    Liked by 1 व्यक्ति

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