माँ


एक तेरे होने से माँ जीवन का अर्थ बदल जाता है
जेठ की दुपहरी में पीपल का छाँव मिल जाता है ।

ईश्वर से जो न माँगा वो वर है ,
मंदिर में गूंजती प्रार्थना का स्वर है ,
मरुथल में बहती शाद्वल का बयार है,
सांझ के धुंधलके में देहरी में जलती दीपक है ।

एक तेरे होने से माँ जीवन का अर्थ बदल जाता है ।

संस्कार की धरा पर ममता के बीज बोती है ,
आशीषों से सींचकर नए पुष्प खिलाती है ,
अपने दोहज से नयी पीढ़ी गढ़ती है ,
आँचल में अपनी वसुधा सहेजती है।

एक तेरे होने से माँ जीवन का अर्थ बदल जाता है।

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें