नारी


लेन -देन की दुनिया में
राधा के त्याग का मान नहीं ।

वासना के संसार में
सीता के अपमान का अंत नहीं ।

स्वार्थ के परिवेश में
मीरा के भक्ति का मोल नहीं ।

क्षण भर के व्यापार में
उर्मिला के प्रतीक्षा का तोल नहीं ।

नारी जिस युग में हो तेरा जनम
कामुक नेत्रों में तेरा सम्मान नहीं ।


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