ना श्याम , ना राम , मुझे शिव सा साथ चाहिए ।
ना रुक्मिणी , ना सीता , मुझे सती सा प्रेम चाहिए।
ना सहचरी ,ना अर्द्धांगिनी ,मुझे अर्धनारीश्वर सा स्वरुप चाहिए ।
ना मर्यादा की अति , ना छल की गति , मुझे सम – स्थिति चाहिए ।
ना कसौटियां , ना लीलाएँ, मुझे निश्छलता चाहिए ।
मुझे शिव सा साथ चाहिए ,मुझे सती सा प्रेम चाहिए ।

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