दोस्त

तुम साथ निभाने का वादा करते हो ,
वक़्त -बेवक़्त मोहब्बत का इज़हार भी करते हो ।
मैं चुप रहती हूँ पर तुम्हारे वादे दिल में उतर जाते हैं ।

मेरे सपनों में तुम अपना रंग भरते हो ,
हमसफ़र नहीं पर साथ चलते हो ।
मैं चुप रहती हूँ पर तुम्हारे वादे दिल में उतर जाते हैं ।

मेरी मुश्किलों को आसान करते हो ,
कोई रिश्ता नहीं फिर भी बंधनों में बांधते हो ।
मैं चुप रहती हूँ पर तुम्हारे वादे दिल में उतर जाते हैं ।

दूर जाने की मेरी शिकायतों में खामोश ही रहते हो ,
फिर मेरी नाराज़गी पर हक़ जताते हो ।
मैं चुप रहती हूँ पर तुम्हारे वादे दिल में उतर जाते हैं ।

फ़ासले हैं कई दरमियान पर तुम क़रीब हो ,
मेरी तन्हाईयों में उम्मीदें सजाते हो ।
मैं चुप रहती हूँ पर तुम्हारे वादे दिल में उतर जाते हैं ।

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