स्वार्थ की लपट में मन आहत हुआ ,
प्रेम आज पुनः नत -मस्तक है ,
अग्नि परीक्षाओं में विश्वास – विफल रहा
वासना के प्रांगण में समपर्ण का नित चीर -हरण हुआ ।
स्वार्थ की लपट में मन आहत हुआ
दर्प के कुंड में टिकुली ने आहुति दी ,
छल के खडग ने मांग के सिन्दूर की बलि ली ,
चीत्कारों में चूड़ियों की खनक रो रही
सेज में बिछियां , महावर एकाकी रही हैं ।
स्वार्थ की लपट में मन आहत हुआ ।
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