शायरी

कुछ रिश्ते पूरे होके भी अधूरे रहते हैं ,
कुछ बातें कह के भी अनसुनी रह जाती हैं ।
हम दोनों साथ थे ,मगर कभी पास नहीं,
रास्ता तो मोहब्बत का था ,मंज़िलें तन्हाई की

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