हाँ मैं मुस्कुराती हूँ जब अकेले में मिलती हूँ ।
रोज़ एक ही धुन गुनगुनाती हूँ ।
आईने में बार -बार निहारती हूँ ।
कहते हैं मुझे इश्क़ हुआ है सच ही कहते हैं ।
तन्हाइयों में खुद से नज़र जो मिली है ।
This site is an original collection of my literary creations like poems and stories.
हाँ मैं मुस्कुराती हूँ जब अकेले में मिलती हूँ ।
रोज़ एक ही धुन गुनगुनाती हूँ ।
आईने में बार -बार निहारती हूँ ।
कहते हैं मुझे इश्क़ हुआ है सच ही कहते हैं ।
तन्हाइयों में खुद से नज़र जो मिली है ।
टिप्पणी करे