सुनो मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ
पर कुछ शर्तें हैं
तुम्हें खाना बनाना तो आता है न
ज्यादा कुछ नहीं करना है
बस माँ जो भी कुछ कहे सुन लेना
बहन का आना -जाना लगा रहेगा
तुम उसके बच्चे सँभाल लेना
तुम तो सुन्दर हो दिवाली में पुरानी साड़ी बांध लेना
भाई को जन्मदिन पर घड़ी दिलानी है


मैं तो तुमपे जान दे सकता हूँ
बस मेरी कुछ लतें हैं
शराब – जुए में तुम्हे भूल जाता हूँ
प्यार में तुम अनदेखा कर देना
जब बात परिवार और तुम्हारी हो
तवज़्ज़ो उन्हीं को दूंगा मेरे अपने हैं
तुम ये आदत बना लेना
कल किसी और की महफ़िल में देखो तो
चुपके से खुद को अलग कर लेना


मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ
पर कुछ शर्तें हैं ।

2 responses to “”

  1. शर्तों में प्यार नहीं होता

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