बिना टैक्स वाली ख़ुशी दे दो
कभी बेवज़ह मुस्कराहट भी दे दो
आँखों की नमी में हलकी सी चमक दे दो
बंद मुट्ठी में किस्मत वाली लकीर भी दे दो
कब तक दूर से तरसाओगे
मन में उम्मीदों की चाहत जगाओगे
रातों में सपने फ़िर दिन में नखऱे दिखाओगे
माशूक़ की तरह फिर दिल जलाओगे
बिना टैक्स वाली ख़ुशी दे दो
कभी बेवज़ह मुस्कराहट भी दे दो
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