खुशी

क्यों रुक – रूककर आते हो तुम ?
छिपकर , डरकर आते हो तुम
कब से दरवाज़े पे खड़ी हूँ
तुम्हारी राह तकती हूँ
देखो मैंने घर को सजाया है
तुम्हारी राहों पर फूल बिछाया है
हर कमरे में तुम्हारा नाम लिखा है
काला टिका भी लगा दिया है

अब आ जाओ बेखटके से
ये दिल है तुम्हारे सज़दे में
ऐ ख़ुशी अब आ जाओ

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