मुझे तुमसे मिलना है

सुनो मुझे तुमसे मिलना है एक रोज़
गरमी की शाम हो या सरदी की दुपहरी
या बारिश का गीलापन
मुझे तुमसे मिलना है एक रोज़

मैं जानती हूँ ये सफऱ मेरा है
और तुम साथ नहीं चल सकते
पर तुम्हारा हाथ थामना है
और ये एहसास ता उम्र सहेजना है
सुनो मुझे तुमसे मिलना है एक रोज़

मैं जानती हूँ ये कहानी मेरी है
और तुम उसके क़िरदार नहीं बन सकते
पर मुझे तुम्हें लिखना है
और ये एहसास ता उम्र सहेजना है
सुनो मुझे तुमसे मिलना है एक रोज़

मैं जानती हूँ ये सपना मेरा है
और तुम उसे पूरा नहीं कर सकते
पर मुझे तुम्हेँ देखना है
और ये एहसास ता उम्र सहेजना है
सुनो मुझे तुमसे मिलना है एक रोज़

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें