1. कितने जज़्बातों को सम्भाल के रखा है
इंतज़ार को लम्हों में तोल के रखा है
उस एक मुलाक़ात की ख्वाहिश में
गुज़रती उम्र को थाम के रखा है
2. जो तू दरिया है तो डूब जाऊं
साहिल है तो थाम लूँ
गर ख़ाब है तो आँखों में बसा लूँ
और राज़ है तो सीने में छिपा लूँ
3. क्यों दिल हर बार उसे चुनता है
जो लकीरों में नहीं ।
दुआएं उसे मांगती हैं
जो तक़दीरों में नहीं ।
ऐ खुदा वो लकीर खींच दे
जो उसके नाम से शुरु हो ।
वो तक़दीर लिख दे
जिसमें उसकी मोहब्बत के अल्फ़ाज़ हों ।
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