तू ही करता – धरता है ।
तू ही विधि – विधाता है ।
तब यह कर्म किसका है?
यह प्रश्न प्रतिक्षण छलता है ।
तू ही आदि – अनंत है ।
तू शून्य तथा पूर्ण है ।
तब यह अंत किसका है ?
तब यह कर्म किसका है ?
यह प्रश्न प्रतिक्षण छलता है ।
तू शिव -शक्ति है ।
तू शाश्वत व गति है ।
तब यह क्षणिकता किसका है ?
तब यह कर्म किसका है ?
यह प्रश्न प्रतिक्षण छलता है ।
तू प्रणय व त्याग है ।
तू समावेश – समर्पण है ।
तब यह परित्याग किसका है ?
तब यह कर्म किसका है ?
यह प्रश्न प्रतिक्षण छलता है ।
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