परशुराम

परशुराम श्री विष्णु के छठवें अवतार थे । ये महर्षि जमदग्नि व रेणुका के पुत्र थे। इनके माता -पिता ने इनका नाम राम रखा था ।परशुराम शिवजी के अनन्य भक्त थे । उन्होंने , शिवजी से युद्ध कला की शिक्षा ली थी तथा विदुयुदभि नामक परशु प्राप्त किया था , तभी से इनका नाम परशुराम हुआ ।

परशुराम ने अपने तीर से समुद्र को सोखकर कोंकण , गोवा व केरल क्षेत्र बसाया ।

हैहय वंश में कार्तवीर्य अर्जुन एक प्रतापी राजा था।उसने अपने गुरु से वरदान स्वरुप हज़ारों भुजाएं प्राप्त की ।उसे सहस्त्रबाहु नाम से जाना गया ।

एक बार सहस्त्रबाहु शिकार खेलते हुए जमदग्नि के आश्रम पहुँच गए । ऋषि ने उनका स्वागत किया ।जमदग्नि के पास कामधेनु गाय थी जिसे सहस्त्रबाहु बलपूर्वक ले जाता है । जब परशुराम को यह बात पता चली तो उन्होंने सहस्त्रबाहु से युद्ध करके उसे मार डाला ।

सहस्त्रबाहु के पुत्रों ने प्रतिशोध स्वरुप परशुराम के पिता को उनकी अनुपस्थिति में मार डाला ।उनकी माता भी पति के साथ सती हो जाती हैं

इस बात से क्रोधित होकर परशुराम ने प्रतिज्ञा ली कि
वे हैहय वंश के सभी क्षत्रियों का नाश करेंगे ।ऐसा कहा जाता है उन्होंने २१ बार क्षत्रियों का नाश किया है ।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वे आज भी मंदराचल पर्वत पर तपस्यारत हैं ।परशुराम ७ चिरंजीवियों में से हैं , जिन्हे हमेशा के लिए अमर माना जाता है ।

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