माँ की सीख

माँ जो सीख देती है ,
जीवन पर्यन्त संग रहती है ।
आज वो रीत निभाती हूँ ,
आ लाडली तुझे कुछ बात बताती हूँ ।

मेरी ममता का निश्छल प्रतिबिम्ब है तू ,
प्रश्न जब संस्कार हो नया इतिहास रच तू ।
मेरी देहरी के दीपक का लौ है तू ,
जब कोई हाथ उठे चिंगारी की लपक बन तू ।
मेरी आँगन में गूंजता हास का स्वर है तू ,
अतिक्रमण जब सम्मान का हो काली का हुंकार बन तू ।

आ लाडली तुझे कुछ बात बताती हूँ ।

इस उपवन का सुन्दरतम पुष्प है तू ,
आघात जब मर्यादा पर हो विदुयुदभि परशु बन तू ।
इस ह्रदय का मधुर गीत है तू ,
अतिशय जब उत्पात हो शंखनाद बन तू ।
मेरी शिक्षा का सशक्त वाणी है तू ,
अन्याय जब हो सर्वत्र गीता का सन्देश बन तू ।

आ लाडली तुझे कुछ बात बताती हूँ ।

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें