मोहब्बत की भी उम्र होती है
ज़नाब
शुरूआती में
मासूम होती है
सच्ची -सच्ची
कुछ कच्ची होती है ।

जब जवां होती है
शरारती , नटखट होती है
बेपरवाह
कभी -कभी
कमबख़्त भी होती है

मध्य -वय में
बोझिल , नीरस होती है
बेबस
और कभी छोड़ जाती है

आख़िरी पड़ाव में
सुलझी होती है
ढलती
पर साथ होती है

मोहब्बत की भी उम्र होती है

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