नंदी की कहानी

एक शिलाद नाम के कृषक थे ।उनकी कोई संतान नहीं थी ।उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की ।भगवान शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए उन्होंने शिलाद से वरदान माँगने को कहा ।शिलाद ने कहा उसे एक आज्ञाकारी पुत्र की प्राप्ति का वर दें।भगवान शिव ने तथास्तु कहा।

एक दिन शिलाद खेत में हल चला रहे थे ।वहाँ उन्हें एक बालक दिखाई देता है ।वह अत्यंत दिव्य बालक था ।आकाशवाणी शीला को उस बालक को पुत्र रूप में अपनाने का निर्देश देती है।

शीलाद उस बालक का पुत्र रूप में पालन -पोषण करते हैं । वह उसका नाम नंदी रखते हैं ।वह बालक ,बाल्यकाल से ही शिव भक्त था ।कुछ समय पश्चात पिता की आज्ञा लेकर वह भुवन नदी के अंदर शिव की तपस्या में लीन हो जाता है उसकी तपस्या से प्रभावित होकर शिव जी दर्शन देते हैं ।

भगवान शिव ,नंदी से वर माँगने को कहते हैं ।नंदी कहते हैं ,वह सदा भगवान शिव के साथ रहना चाहते हैं ।भगवान शिव कहते हैं ,आज से तुम मेरे वाहन के रूप में मेरे साथ कैलाश में रहोगे ।आज से तुम्हारा मुख एक बैल के जैसे होगा।

उस दिन से नन्दी ,भगवान शिव के साथ उनके वाहन के रूप में कैलाश में रहते हैं।

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