यूँ सरल नहीं

यूँ सरल नहीं
उसे प्रेम करना
जो न था कभी तुम्हारा
न कभी होगा

यूँ सरल नहीं
रुक्मणी बन पाना
पत्नी होकर , सदा
राधे -कृष्ण सुनना

यूँ सरल नहीं
राधा भी बन पाना
प्रेम ह्रदय में रख
कृष्ण किसी अन्य को सौंप देना

यूँ सरल नहीं
उर्मिला बन पाना
तारुण्य अवस्था में
विरह सह पाना

यूँ सरल नहीं
सीता भी बन पाना
गर्भ में लव -कुश धर
परित्याग सह पाना

यूँ सरल नहीं
मीरा बन पाना
प्रेम का अमृत चख
गरल का पीना

यूँ सरल नहीं
भावों को भी
शब्दों की अभिव्यक्ति देना

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