प्रेम

किसी ने मुझसे पूछा
प्रेम क्या है ?
मैंने कह दिया
वो जो मेरी माँ
के आँखों में
झलकता है ,
मेरे पिता के
आशीष में बसता है
और मेरे भाई के
कलाई में बंधता है
वो जो कौंधती है
मेरे बच्चों की
हंसी में ,
वही तो प्रेम है
वही तो निश्छल है।

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