उन अनकहे जज़्बातों को ,
आज मैं लिखने लगी हूँ ।
वो बातें जो ज़ुबान पे आके लौट गयीं ,
आज मैं लिखने लगी हूँ ।
जो प्रश्न मैंने पूछे ही नहीं ,
आज मैं लिखने लगी हूँ ।

मिलन के अधूरे ख़्वाबों को ,
आज मैं मिटाने लगी हूँ ।
जो दुनिया कभी बसी ही नहीं ,
आज मैं मिटाने लगी हूँ ।
लम्हे जो कभी साथ गुज़ारे ही नहीं
आज मैं मिटाने लगी हूँ ।

झूठे – अधूरे वादे सारे ,
आज मैं भुलाने लगी हूँ ।
कल के क़िस्सों को ,
आज मैं भुलाने लगी हूँ ।
अब मुझे याद न आना ,
आज मैं भुलाने लगी हूँ ।

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