तेरी मशरूफ़ियत पे अपनी मोहब्बत रख दूँ
जो तू है ख़फ़ा अपने वफ़ा की क़सम रख दूँ
हाँ फ़ासले हैं बहुत दरमियान
पर तू इजाज़त दे तो बाहों में समेट लूँ
कहते हैं कि उम्र बहुत कम है ज़िंदगी की
आज हर लम्हा मैं तुझे जी लूँ
लो मिटा दी मैंने मजबूरियाँ सारी
वक़्त , जज़्बात , फ़ैसला सब रख दी मुट्ठी में तेरी
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