काश कि ये वक़्त थम जाए
और मैं तुम्हे अपनी आँखों में भर लूँ
जी लूँ हर लम्हा तुम्हारे साथ
कि न जाने तुम फिर कब आओगे?
कुछ और देर रुक जाओ
तो मैं तुम्हे अपने कैनवास पर उतार लूँ
और अपने इंतज़ार के ब्रश से रंग दूँ
कि न जाने तुम फिर कब आओगे?
This site is an original collection of my literary creations like poems and stories.
काश कि ये वक़्त थम जाए
और मैं तुम्हे अपनी आँखों में भर लूँ
जी लूँ हर लम्हा तुम्हारे साथ
कि न जाने तुम फिर कब आओगे?
कुछ और देर रुक जाओ
तो मैं तुम्हे अपने कैनवास पर उतार लूँ
और अपने इंतज़ार के ब्रश से रंग दूँ
कि न जाने तुम फिर कब आओगे?
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