कल जब बात हुई तुझसे
लगा कुछ ऐसे
कि या तो उम्र बढ़ गई है मोहब्बत की
और तकरार बन गयीं दर्द बर्दाश्त की
या फिर तूने बो दिए है बीज
फासलों के अब

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