1. ज़िम्मेदारियों की किताबों के बीच,
अक्सर मोहब्बत का फूल मुरझा जाता है।
खुशबु ज़ेहन में रह जाती है ,
मगर वजूद पन्नों में दब जाता है।
2. दूरियों में दूरियों का एहसास बढ़ने लगा है ,
बदलते मौसम के साथ तेरे बदलने का एहसास बढ़ने लगा है।
ज़िक्र मेरा जो कभी तेरे लबों में सजता था।,
आज पेशानी पे तेरे सलवटों का वजह बनता है।
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