नव्या

मेरे उपवन में खिली एक नन्ही कली,
जगत-जननी के आशीष से मिली।

बड़े जतन से है तुझपे लाड़ लुटाया ,
सारा जग है तुझ पर वारा।

तू जो मुस्काती है परी
ह्रदय की धड़कनें मैंने है वारी।

मेरे उपवन में खिली एक नन्ही कली,
जगत-जननी के आशीष से मिली।

जब तूने पालने से हाथ थामा मेरा
कर दिया तब मैंने नाम तेरे जीवन सारा।

तू ज्यों-ज्यों खिलती रही
संग तेरे मैं भी निखरती रही।

मेरे उपवन में खिली एक नन्ही कली,
जगत-जननी के आशीष से मिली।

तोतली बोली से जब माँ पुकारा
पुलकित हो मन नाच उठा मेरा।

जब तू आज आईने में शर्माती है
माँ तेरी तुझ पर रीझती है।

मेरे उपवन में खिली एक नन्ही कली,
जगत-जननी के आशीष से मिली।

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