गांव – शहर
गली, चहर-पहर।
आओ करें संगवारी
पोरा की तैयारी।
भादों का मास
पिठौरी अमावस।
कान्हा ने किया पोलासुर वध,
दिया रक्षण गौ और वृषभ।
खोल दे रे अलबेला
आज नांगर आउ बैला।
बना के व्यंजन नाना
करेंगे पूजा-अर्चना।
बच्चे उठकर भिनसारे
माँ-बाबा को पुकारें।
आज हे तिहार पोरा
कहाँ हे मोर माटी के बैला ?
है ये पर्व-पावन
हर्षित है जन-जन।
सजे हैं नांगर और बैल
झूम रहे हैं कृषक।
आज पोरा है पोरा।
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