प्रिय ! जब तुम आना,
मैं धरती बन जाऊं,
तुम मेरा अम्बर बनना।
मैं मिट्टी सी भीग जाऊं,
तुम मेघ बन बरसना।
प्रिय ! जब तुम आना,
मैं लतिका सी लिपट जाऊं,
तुम शाखाओं सा मुझे सहेजना।
मैं रजनीगंधा सी सुवासित होऊं,
तुम रात्रिजल बन मुझमें शोभना।
प्रिय ! जब तुम आना,
मैं जल-तरंग बन जाऊं,
तुम समीर बन मुझे छूना।
और मैं प्रेम बन जाऊं,
तुम मेरी परिभाषा बनना।
प्रिय ! जब तुम आना |
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