शायरी

ज़िन्दगी कभी-कभी कुछ रूकती सी लगती है,
कि कुछ दूर चलने के बाद ठिठकती सी लगती है।
मैं समझाती हूँ कि चलते ही रहना है ,
कदम दर कदम आगे बढ़ते ही रहना है।
पर, न जाने क्यों ख़फ़ा सी लगती है,
कि उसको गले लगाने की हर कोशिश नाकाम सी लगती है।

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