समय भी क्षण भर सो गया ,
प्रकृति ने ऐसी अनुपम, अलौकिक छटा बिखेरी ,
समीर ने कर्णप्रिय संगीत दिया,
विहंगों ने मधुर गीत गाया ,
समय भी क्षण भर सो गया प्रकृति की गोद में।
पंख फैला शिखावल (मोर) ने थपकी दी,
बत्तख़ों ने इंद्रजाल फैलाया ।
समय भी क्षण भर सो गया प्रकृति की गोद में ।
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