लाल, गुलाबी, नीला,
तन पर रंग डाला।
सखी ! कह दो सजन से रे,
कि मन मेरा कोरा-कोरा,
डाल के रंग प्रेम का, रंग दे पूरा।
भीगी नहीं चोली, भीगी नहीं अंगिया।
होली बीते फीकी, बिन रंग रसिया।
सखी! फाग के गीत में विरह राग डाला।
सजन है मेरा बड़ा ही अलबेला।
This site is an original collection of my literary creations like poems and stories.
लाल, गुलाबी, नीला,
तन पर रंग डाला।
सखी ! कह दो सजन से रे,
कि मन मेरा कोरा-कोरा,
डाल के रंग प्रेम का, रंग दे पूरा।
भीगी नहीं चोली, भीगी नहीं अंगिया।
होली बीते फीकी, बिन रंग रसिया।
सखी! फाग के गीत में विरह राग डाला।
सजन है मेरा बड़ा ही अलबेला।
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