मिल जाऊंगी।

कभी जो तुम्हें याद आए मेरी,
सबसे छिपाकर रखे उन खतों को,
तुम पढ़ लेना,
और जो चाँद को देखकर,
गीत गाए थे मेरे लिए,
तुम गुनगुना लेना।
ग़र मैं फिर भी न मिली तो,
तलाश लेना मुझे गुलाब के फूलों में,
मैं महक बनकर तुम्हारे बदन में मिल जाऊंगी।

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