अब आओ

ढल रहा दिवस है,
जलाया चाँद का दिया है,

कि अब तो आओ।

नयनों के पुष्प बिछाए हैं,
प्रेम के धूप जला दिए हैं।

कि अब तो आओ।

तारक हैं मंडप,
धरती बनी सेज।

कि अब तो आओ।

गा रही है रजनी,
दुल्हन बनी अनुरागिनी।

कि अब तो आओ।

मिलन की बेला है,
सरक रही घूंघट है।

कि अब तो आओ।

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