चरित्रहीन स्त्रियां

वे स्त्रियां चरित्रहीन होती हैं,


जिनकी हंसी की आवाज़,
कमरे से निकलकर,
दरवाज़े को लांघती हुई,
सड़कों पर गूंजती है।

जो अपने मन की भावों को,
पुरुषों से ऊंचे स्वर में,
बेबाक कहती हैं

घूंघट को दहलीज़ पर छोड़कर,
अन्याय के खिलाफ,
सड़कों, अदालतों, और मंचों तक जाने वाली
स्त्रियां भी चरित्रहीन हैं।

पति के अनैतिकता के खिलाफ,
तथाकथित हितैषियों का
बगावत करने वाली,
स्त्रियों को भी चरित्रहीन कहते हैं।

चरित्रहीन तो वह स्त्रियां भी हैं,
जो अपने अधिकारों की मांगें
करती हैं।

और उन्हें चरित्रहीन कहने का अधिकार,
उन पुरुषों के पास है,
जो उसके शरीर के कपड़ों के
साथ उसकी आत्मा
को भी तार-तार करते हैं।

अपने पुरुषत्व को प्रमाणित करने के लिए,
गैर औरत की बांहों में लोटते हैं।

स्त्री की सीमाएं तय करने वाले पुरुष भी
उसे चरित्रहीन कह सकते हैं।

प्रेम व हित के नाम
पर प्रतिपल छलने
वाले पुरुष भी,
उसे चरित्रहीन कहते हैं।

जिस पुरुष की जननी स्त्री है,
उसे भी स्त्री को चरित्रहीन कहने का
सम्पूर्ण अधिकार है।


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