बिदा घड़ी आयी,
कि कर दो बिदाई। ओ बाबुल !
कि लाड़ली चली है पिया के घर,
दे दो आशीष भर-भर। ओ माँ !
छूटा है उसके बचपन का अंगना,
देखो राखी छूटे ना। ओ भाई !
बैठी है कोने में गुड़िया अब भी,
पीहर आती रहना कभी। ओ सखी !
गूंजती है घर में दादी की कहानी,
सुनती रहना रानी। ओ मेरे बचपन !
दादा के लाठी की ठकठक,
आते हैं आँखों में आंसू छलक। ओ लाड़ली !
बिदा घड़ी आयी,
कि कर दो बिदाई। ओ बाबुल !
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