सजन सलोना

ओ सजन सलोना रे !
काहे देखे दूर-दूर से ?

तेरी अंखियां तड़पाती हैं,
मेरा जिया जलाती हैं |

कटती नहीं रात बैरी तुझ बिन,
विरह डसती है बनकर नागिन |

हो कौन सा देश पिया बसा ?
ना कोई चिट्ठी-संदेशा |

ओ चन्दा कह दे पिया से,
प्रेम, मिलन को तरसे |

ओ सजन सलोना रे !
काहे देखे दूर-दूर से ?

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