उसे मैं खुद से यूँ दूर रखती हूँ,
मेरी मोहब्बत और बातों पर हक़ है,
ग़मों और खुशियों पर पर्दा रखती हूँ।
उसे मेरी सारी मालूमात है,
मगर न जान पाने का मलाल अक्सर रहता है।
वो मेरा बेहद अज़ीज़ है,
मेरे अपनों में पर उसका कोई ज़िक्र नहीं।
उसे मैं खुद से यूँ दूर रखती हूँ।
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