गीत

इस झूठ-सच की दुनिया से,
मुझे ले चल अपनी नगरिया में ।

तेरे प्रेम के छाँव में,
गंगा के पावन धार में ।

मैं भीगती रहूँ, मैं रिझती रहूँ ।
हर क्षण तेरा गीत गाती रहूँ।

तू तम से प्रकाश का द्वार है,
मोह से मोक्ष का आधार है ।

तू कण-कण है, रज-रज है।
तू शिव है , तू शक्ति है।

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