नक़ाब
बाज़ार में कई नक़ाब हैं,
पर सबसे खूबसूरत
नक़ाब है, दोस्ती का।
उसने नक़ाब पहनकर
पूछा मेरा हाल,
पता है, ‘दर्द है,
दर्द क्या है?’
मैंने भी चाहा,
बताना अपना हाल,
दिल का दर्द,
चोट का निशान।
पर चेहरा नहीं दिखता,
दिखता है, नक़ाब,
और
बाज़ार में कई नक़ाब हैं।
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