प्रश्नों के बवंडर में,
डूबता उतरता मन।
झूठ-सच के पलड़े में,
तुलता मन।
मन रे, मन रे |
जीने की आस में,
मरता मन।
खुशियों की तलाश में,
खोता मन।
मन रे, मन रे |
नींद के कांधे में,
जागता मन।
भीड़ के शहर में,
अकेला मन।
मन रे, मन रे |
This site is an original collection of my literary creations like poems and stories.
प्रश्नों के बवंडर में,
डूबता उतरता मन।
झूठ-सच के पलड़े में,
तुलता मन।
मन रे, मन रे |
जीने की आस में,
मरता मन।
खुशियों की तलाश में,
खोता मन।
मन रे, मन रे |
नींद के कांधे में,
जागता मन।
भीड़ के शहर में,
अकेला मन।
मन रे, मन रे |
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