बचपन सलोना

था बचपन हमारा सलोना,
आँखों में काजल, माथे पे दिठौना।
दिठौने से माँ लेती थी बलाएं,
जादू-टोना, बुरी नज़र पास न आए।
पास पापा थे हमको थे बुलाते,
संग जब वो मिठाई लाते।
मिठाई में बंटता पापा का दुलार,
मीठी-तीखी, तीखी धार।
तीखी बातों में जीवन का गीता,
कहानियों में माँ की ममता।
ममता में प्रेम का सन्देश,
दो शब्दों में सिमटता दर्शन।
सिमटती है आँचल में दुनिया,
राजा बेटा और नन्ही मुनिया।
बचपन हमारा था सलोना,
आँखों में काजल, माथे पे दिठौना।

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