बनारस के घाटों सा पावन प्रेम हमारा,
अंत से आदि, आदि से अंत, प्रियतम संग तुम्हारा।
बनारस की घाटों सा पावन प्रेम हमारा।
मैं बन जाऊं बांसुरी तेरी,
अधरों से छूके छेड़ दे तान कोई,
राग-राग हो प्रणय,
हर ताल में हो अपना मिलन।
बनारस की घाटों सा पावन प्रेम हमारा ।
मैं बन जाऊं कविता तेरी,
हाथों से लिख दे छंद कोई,
अक्षर-अक्षर हो प्रीत,
हर अर्थ में हो अपना संगम।
बनारस की घाटों सा पावन प्रेम हमारा ।
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