शायरी

बड़ी मुश्किल से सिखाया है पलकों को सोना
तू आ कर मेरी नींदें न चुराना
यूँ बे रोक-टोक सपने में न छेड़ना
मेरे इन संभाले कदमों को न फिर से लड़खड़ाना

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