शायरी

1. दर्द के बंधन से बंधते,
कुछ अनकही समझते।
दो अलग राहों में साथ चलते,
ये नादान सी हसरतें।

2.

नदी के दो किनारे हम-तुम,
साथ-साथ पर दूर हम-तुम।
मैं चंदा तू चकोर मेरा,
आधा-आधा मिलन हमारा।

3.

नाराज़गी के चाशनी में मीठा इश्क़,
शिकायतों की चाय में चुस्की सा इश्क़।

4.

बहुत वादे किये थे तुमने,
कुछ झूठे, कुछ सच्चे थे।
मैं बिखरती रही, संवरती रही।
तुम मुझे रीता करती रहे ,
बहोत सोचते हो, समझते हो,
मोहब्बत को भी तोलते हो।
जाने दो यार, ये मोहब्बत सबके समझ नहीं आती
जो उठना चाहते हैं, उन्हें मोहब्बत में गिरना नहीं आती

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