चाह

कोई चाह नहीं थी,
ना तेरे साथ की
ना तेरे पास होने की
न तेरे नाम की
न तेरे रिश्ते की
बस एक चाह थी
तेरे साथ होने के एहसास की
ठण्ड से सिकुड़ती रातों को
तेरे धूप की
भंवर में डूबते कश्ती को
तेरे किनारे की
मन में टूटते उम्मीदों को
तेरे प्यार की

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