• शायरी

    1. दर्द के बंधन से बंधते,कुछ अनकही समझते।दो अलग राहों में साथ चलते,ये नादान सी हसरतें। 2. नदी के दो किनारे हम-तुम,साथ-साथ पर दूर हम-तुम।मैं चंदा तू चकोर मेरा,आधा-आधा मिलन हमारा। 3. नाराज़गी के चाशनी में मीठा इश्क़,शिकायतों की चाय में चुस्की सा इश्क़। 4. बहुत वादे किये थे तुमने,कुछ झूठे, कुछ सच्चे थे।मैं बिखरती… Read.

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