• बचपन सलोना

    था बचपन हमारा सलोना,आँखों में काजल, माथे पे दिठौना।दिठौने से माँ लेती थी बलाएं,जादू-टोना, बुरी नज़र पास न आए।पास पापा थे हमको थे बुलाते,संग जब वो मिठाई लाते।मिठाई में बंटता पापा का दुलार,मीठी-तीखी, तीखी धार।तीखी बातों में जीवन का गीता,कहानियों में माँ की ममता।ममता में प्रेम का सन्देश,दो शब्दों में सिमटता दर्शन।सिमटती है आँचल में… Read.

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