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प्रेम में परिवर्तन की प्रथा है,कोई कालिदास बन जाता है,कोई पृथ्वीराज होता है। प्रेम में समर्पण की संवेदना है,कोई मन में धर मीरा है,कोई बन में फिर शबरी है। प्रेम में त्याग का तप है,कोई महलों में उर्मिला है,कोई बरसाने में राधा है। प्रेम में प्रतीक्षा का फल है,कोई शिला रूप में अहिल्या है,कोई शिव… Read.