अब हमें संस्कार न सिखाओ
अब हमें संस्कार न सिखाओ,
युद्ध की कला सिखाओ ।
जिस रूप में हो दुश्मन ,
घर में हो या मैदान में ।
अब हमें झुकना न सिखाओ
अब हमें झुकना न सिखाओ,
युद्ध की कला सिखाओ ।
पिता , पति , भाई , अज्ञात या पुत्र ,
जिस वेश में हो अमित्र ।
अब हमें डरना न सिखाओ
अब हमें डरना न सिखाओ,
युद्ध की कला दिखाओ ।
घूरती आँखों , नोचते हाथों से ,
बांधते नियमों से ।
अब हमें बंधना न सिखाओ,
अब हमें बंधना न सिखाओ,
युद्ध की कला सिखाओ।
घूंघट में कभी बुर्के में ,
और कभी घर की चारदीवारी में ।
अब हमें छिपना न सिखाओ
अब हमें छिपना न सिखाओ,
युद्ध की कला सिखाओ।
अब हमें संस्कार न सिखाओ ।

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